पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर त्रिशताब्दी जन्म समारोह पर गो सेवा आयोग में संगोष्ठी का आयोजन

 

पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर

 त्रिशताब्दी जन्म समारोह पर   गो सेवा आयोग में संगोष्ठी का आयोजन 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश गौसेवा आयोग द्वारा आज दिनांक 23 मई 2025 को पुण्य श्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की त्रिशताब्दी जन्म जयन्ती के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इन्दिरा भवन स्थित आयोग के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन, विचारों एवं वर्तमान समय में उनके अनुकरणीय योगदान की प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की गई।




लोकमाता अहिल्याबाई होलकर केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि भारतीय स्त्री नेतृत्व की सर्वोच्च प्रतीक थीं। उन्होंने नारी सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, गोसंरक्षण, जल प्रबंधन और धर्म-संस्कृति के संरक्षण में जो ऐतिहासिक कार्य किए, वे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने 18वीं शताब्दी में थे। वर्तमान समय में जब भारत सतत विकास, जलवायु संतुलन, पर्यावरणीय चेतना और नारी भागीदारी को लेकर नई दिशा की ओर अग्रसर है, तब अहिल्याबाई जी का जीवन मार्गदर्शक बनकर सामने आता है।

मुख्य वक्ता श्रीमती सुषमा सिंह (पूर्व उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग) ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई ने सामाजिक समरसता, जनकल्याण एवं गौसंरक्षण को शासन के केंद्र में रखा। आज हमें उनकी नीतियों से प्रेरणा लेकर नीतिगत समर्पण के साथ संवेदनशील प्रशासन की ओर बढ़ना चाहिए।

मुख्य अतिथि माननीय अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश गौसेवा आयोग ने कहा कि लोकमाता का जीवन दर्शन, विशेषकर उनका गौसेवा व ग्राम आधारित विकास मॉडल, आज के भारत को आत्मनिर्भर एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

विशिष्ट अतिथि माननीय श्री राजेश सिंह सेंगर, माननीय श्री रामाकांत उपाध्याय एवं माननीय श्री दीपक कुमार गोयल ने भी लोकमाता के जीवन के विविध पहलुओंधार्मिक सहिष्णुता, महिला नेतृत्व, पारंपरिक ज्ञान, पर्यावरणीय संतुलन और गोसंवर्धनपर विचार रखते हुए उन्हें समकालीन भारत के लिए एक आदर्श रोल मॉडलबताया।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, पर्यावरणीय पुनरुत्थान एवं गौसंरक्षण जैसे ज्वलंत विषयों पर महिलाओं की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया। यह भी स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण भारत में महिलाएं न केवल जल-जंगल-ज़मीन की संरक्षक हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक चेतना की वाहक भी हैंजिस भूमिका को सबसे पहले अहिल्याबाई होलकर ने शासन-व्यवस्था के माध्यम से साकार किया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आयोग के सदस्यों ने भाग लिया। समस्त वक्ताओं ने एक स्वर में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन-दर्शन को राष्ट्रीय पुनर्निर्माण की प्रेरणा के रूप में अंगीकार करने की अपील की।

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 निवेदन कर्ता -

     उत्तर प्रदेश भारतीय नागरिक कल्याण समिति ( रजि )द्वारा जनहित में जारी  










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